विनेश चंदेल
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल के कोयला घोटाले से जुड़े विनेश चंदेल को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तार कर लिया। ED ने 2 अप्रैल को दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई में एक साथ छापेमारी की थी। विनेश चंदेल राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म I-PAC का डायरेक्टर और को-फाउंडर है। यह ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल में फिर से मुख्यमंत्री बनाने की योजना पर काम कर रहा था। इसे प्रशांत किशोर उर्फ़ पीके का चेला भी माना जाता है।
ED ने विनेश चंदेल को सोमवार देर शाम नई दिल्ली गिरफ्तार किया और मंगलवार सुबह विशेष अदालत में पेश किया। दिल्ली की एक अदालत ने विनेश चंदेल को 14 दिनों की प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत में भेज दिया है।
विनेश चंदोल ने लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद टाइम्स ग्लोबल ब्रॉडकास्टिंग कंपनी लिमिटेड में नौकरी शुरू की। इसके बाद ओवरसीज़ इंफ्रास्ट्रक्चर अलायंस (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड में लीगल कंसलटेंट की भी नौकरी की। इसके बाद उसने कुछ साल तक सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में वकालत की प्रैक्टिस भी की। प्रशांत किशोर जब चुनावी रणनीतिकार के पेशे में आए तब उसने आईपैक (I-PAC) नाम की कंपनी बनाई थी। आईपैक में विनेश चंदोल बतौर को-फाउंडर शामिल हुए।
प्रशांत किशोर और विनेश चंदोल ने मिलकर 2014 के लोकसभा चुनाव, 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव, दिल्ली, तेलंगाना, पंजाब, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश जैसे कई चुनावों में अलग-अलग दलों के लिए काम किया। आखिरकार 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में ममता बनर्जी को प्रचंड जीत मिलने के बाद प्रशांत किशोर ने राजनीतिक रणनीतिकार के पेशे से अलग हो गए। उन्होंने पहले बिहार में पदयात्रा, फिर जनसुराज नाम से राजनीतिक दल बनाकर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में हिस्सा लिया। लेकिन प्रशांत किशोर और उनकी पार्टी जनसुराज एक भी सीट नहीं जीत पाई। प्रशांत किशोर के राजनीति में जाने के बाद आधिकारिक रूप से आईपैक को विनेश चंदोल ही संचालित कर रहा है।
इस बार के बंगाल चुनाव में भी आईपैक TMC के लिए प्रबंधन का काम कर रही है। पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में वोटिंग होनी है। ऐसे में यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है। ED ने विनेश चंदेल के दिल्ली स्थित ठिकानों के अलावा बेंगलुरु और मुंबई में भी छापेमारी की। बेंगलुरु में I-PAC से जुड़े ऋषि राज सिंह और मुंबई में विजय नायर के ठिकानों को भी खंगाला। इन कड़ियों को अरविंद केजरीवाल से जुड़े संदिग्ध संपर्कों के आधार पर देखा जा रहा है।
इससे पहले जनवरी में ED की छापेमारी के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया था, जब ममता बनर्जी ने कथित तौर पर तलाशी प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया था। मीडिया के कैमरे में वह घटना कैद हुई थी जब ममता बनर्जी ED की छापेमारी के दौरान खुद कथित रूप से आई पैक से जुड़ी फाइल लेकर बाहर निकल गई थीं। उस समय कोलकाता पुलिस और ED के बीच टकराव के हालात बने हुए हैं।
ED की जांच 2020 में दर्ज उस मामले से जुड़ी है, जिसमें कथित कोयला तस्करी सरगना अनूप मांझी उर्फ ‘लाला’ और अन्य पर आरोप लगे थे। ED के मुताबिक इस गिरोह ने ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) की बंद पड़ी खदानों से अवैध रूप से कोयला निकालकर उसे बाजार में बेचा, जिससे बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग हुई।
